Tuesday, 2 June 2020

02 Jun 2020

मेरे पास भी एक पिंजरा है
और उसमे एक परिंदा है
मुझे उनसे प्यार है और हाँ
उन्हें भी मुझसे बेहद मुहब्बत है
मेरे परिंदे को इजाजत है कि
जब जी चाहे उड़ सकते हैं.
ना मैंने पिंजरे का दरवाजा बंद किया
ना ही पर कतरे ना ही पैरों में.
बेड़ियाँ डाली है.

वो उड़ते जरूरहै
खुले आसमान में लेकिन
फिर लौट आतेहैं उसी पिंजरेमें वापस
लोग पूछते हैं ज़माने को हैरत हैकि
वो उड़ क्यूँ नहीं जाते?
मैं लोगों को कैसे समझाऊं
ज़माने को कैसे बताऊँकि
मैंने उनके पैरों मेंअपने मुहब्बतकी
बेड़ियाँ बाँध रखीहै
उनके कदमों में 
मैंने अपनी जान रखी है
~नैंना
.....


पिंजरा तेरा 💕दिल..!!
परिंदा मेरा 💕दिल..!?

फिर भी ...✍️
ए दिल 🍃💜🍃है मुश्किल.!?

खूबसूरत लिखा है आपने 👏👏👏 
.........


हम चटानों की तरह साहिल पे ढाले जाएँगे 
फिर हमें सैलाब के धारे बहा ले जाएँगे,
ऐसी रुत आई अँधेरे बन गए मिम्बर के बुत 
गुंबद-ओ-मेहराब क्या जुगनू बचा ले जाएँगे।
.....


मुझ को शिकस्तगी का क़लक़ देर तक रहा 
क्यूँ चेहरा फिर जनाब का फ़क़ देर तक रहा,
यूँ तो कई किताबें पढ़ीं ज़ेहन में मगर 
महफ़ूज़ एक सादा वरक़ देर तक रहा।
......


कैफ़ियत क्या थी यहाँ आलम-ए-ग़म से पहले 
कौन आया था तिरी बज़्म में हम से पहले,
सब करम है तिरे अंदाज़-ए-सितम से ऐ दोस्त 
ज़ौक़-ए-ग़म दिल को न था तेरे सितम से पहले,
बंदगी तेरी ख़ुदाई से बहुत है आगे 
नक़्श-ए-सज्दा है तिरे नक़्श-ए-क़दम से पहले।
.......


क़ल्ब-ए-इंसाँ को है अब फिर उसी आलम की तलाश 
तेरी महफ़िल थी जहाँ दैर-ओ-हरम से पहले,
हम से मंसूर ज़माने में कहाँ हैं 'अख़्तर' 
दार तक आ नहीं सकता कोई हम से पहले।
.......


आज फिर गुज़़रेंगे क़ातिल की गली से हम लोग 
आज फिर बंद मकानों के दरीचे होंगे,
जिस की हर शाख़ पे राधाएँ मचलती होंगी 
देखना कृष्ण उसी पेड़ के नीचे होंगे,
इक मकाँ और भी है शीश-महल के लोगो 
जिस में दहलीज़ न आँगन न दरीचे होंगे।
.......


ख़ुदा के वास्ते अपना हिसाब रहने दो
सुबह तलक़ मेरे आगे शराब रहने दो,
ये क्या के ख़ुद हुए जा रहे हो पागल से
ज़रा सी देर तो रुख़ पे नक़ाब रहने दो,
ये आईना है इसे तोड़ने से क्या हासिल
ख़ुद अपने वास्ते अपना जवाब रहने दो,
हमें भी अपने ज़रा और पास आने दो
हमें भी और ज़रा सा ख़राब रहने दो।
.......




Monday, 1 June 2020

उफ़्फ़

उफ़्फ़ !!
ये तुम्हारे पहलू में इतनी रोशनी,
के चाँद की चाँदनी भी फीकी लगे..
तुम्हारे जानिब,
कोई "कहकशाँ" है क्या✨!!

Sunday, 31 May 2020

हिन्दी

अब दिल इजहार ऐ इश्क से 
थोड़ा थोडा आगे बड़ने लगा है 
दिल पर किसकी चलती हे 
ये कहा कीस के रोके रुका है।


हिन्दी

कुछ ख्वाहिशें थी गुमशुदा सी,
कुछ अधूरी चाहतें थी,

कुछ टूटे रिश्तों की अस्थियाँ,
और एक खोया हुआ लम्हा,

कुछ भीगे हुए एहसास,
कुछ मन के जज़्बात,

कुछ और भी था शायद उस गुल्लक में 
जिसे तोड़ दिया तुमने और बिखेर दिया रात के अंधेरे में, 

और मैं खड़ी देखती रही तुम्हें हतप्रभ सी।

हिन्दी

फिर भी तेरा
इंतज़ार रहेगा ताउम्र
तुम आना या ना आना
ये तेरी इच्छा है पगली
मै तो तेरा था तेरा हूं
और तेरा ही रहूंगा,

बस मुझे ये बता दे
कि मुझे मेरे सब्र का फल
वो जो बहुत मीठा है
मिलेगा या नहीं...

हिन्दी

एक हमसफ़र वो होता है जो पूरी ज़िन्दगी साथ निभाए, 
और एक हमसफ़र वो जो चंद लम्हों में पूरी ज़िन्दगी दे जाए।

हिन्दी

आज फिर, मैंने खिड़की के बाहर
एक दीपक लटका दिया
आज फिर, मैंने तुम्हारे लिए अपने
इंतजार की घड़ियां बढ़ा दी
और टांग दिया खिड़की के बाहर
अपना दिल...

रात आ गई है, हवा चल रही है
और आखिरी रौशनी भी
तुम्हारे इंतज़ार में मद्धम हो गई।

हिन्दी

ज़िंदा थे, तो मांगी थी मन्नतें,
विसाल ए यार की,
वो मन्नतें, वो दुआएँ, 
आज कबूल हो गई,
वो अ कर मेरी मज़ार पे, 
दिया जला गए।

हिन्दी

तू इस तरफ ना निगाह कर
मैं ग़ज़ल का हुस्न कुछ निखार लूँ,
बना के हर लफ़्ज़ को आईना
तुझे ग़ज़ल में अपनी मैं उतार लूँ।💕💕

हिन्दी

बिखेर के युं बालों को अपने तुम 
युं मुस्कराया न करो 
देख कर तेरी ये हंसी 
जलन होती हे इन फीजाओं को।


हिन्दी

मै और मेरी चंद किताबें
अक्सर मसगूल रहती हैं,

कुछ अनकही सी कहने वाली बातें
अपने आप में समेटें रहती हैं,

कहना चाहती हैं बहुत कुछ मगर
अक्सर खामोश सी ही रहती हैं,

पढ़ना चाहो तो पढ़ लेना इन्हें एक बार
ये तेरे इश्क़ में डूबी रहती हैं
ये तेरे इश्क़ में डूबी रहती हैं।

हिन्दी

अगर हिम्मत है तो आओ मुकाबला इश्क करें 
हारे तो आप हमारे 
और अगर जीते तो हम तूम्हारे।


हिन्दी

क्या नाम दु में अपनी मोहब्बत को 
कि ये तेरे सिवा किसी और से 
होती ही नहीं है।


हिन्दी

बहुत मन हो रहा हे आज उसको छुने का 
हे भगवान 
हो सके तो कुछ पल के लिए आज 
मुझे हवा बना दे।


हिन्दी

कोई गजल सुना कर क्या करना 
युं बात बड़ा कर क्या करना 
तुम मेरे थे तुम मेरे हो 
दूनीया को बता कर क्या करना 
तुम साथ निभाओ चाहत से 
कोई रस्म निभा कर क्या करना 
तुम खफा भी अच्छे लगते हो 
तो फिर तुमको मना कर क्या करना।


हिन्दी

निकाल दे निचोड़ कर मेरी रंगों से 
सारा खुन 
अगर ना आई वफा नजर किसी कतरे से 
तो बेवफा कह देना।


हिन्दी

आंखो में बस गए हो तुम 
तुम्हें हमने दील में छूपा लीया है 
अब जब भी दिल चाहे तुम्हें देखे 
तुम्हैं आइना बना लिया है।


हिन्दी

प्रेम करना अलग बात है,
प्रेम में जीना अलग बात है,
प्रेमी बनना बहुत आसान पर, 
प्रेम बन पाना उतना ही कठिन है।
प्रेम तन का स्पर्श नही, 
आलिंगन के पश्चात; 
आत्मा मिलन प्रेम है।
प्रेम अद्भुत अनुभूति है, 
जीवन में सबसे अनमोल भेंट प्रेम है।





हिन्दी

इंतजार वो जहर है जिसे पिलाने वाले को 
कोई हजा नहीं मिलती 
मगर पिने वाला हर सांस में 
न जाने कितनी बार मरता है।


हिन्दी

हमारी शायरीयों में भी क्ई राज दफन हे 
के जिंदगी हे ऐक लिबास 
और रुह ऐक कफन हे।


हिन्दी

जरा बैठ नजर के सामने 
बेधड़क दीदार करने दे 
मोहब्बत की इस बारीस में 
मोहब्बत बार बार करने दे।


हिन्दी

न झुकने का शौक हे 
न झुकाने का शौक हे 
कुछ अहसास दिल से जूड़े है 
बस उन्हें निभाने का शौक हे।


हिन्दी

पतझड़ की कहानीयां सुनाकर 
उदास ना कर ऐ जिंदगी 
नये मौसम का पता बता 
जो गुजर गया 
वो गुजर गया।


हिन्दी

शिद्दत ऐ इश्क नहीं देखता महबूब 
पत्थर हे या कोहीनुर है 
गर इश्क इश्क हे तो 
हर हाल में मंजुर हे।


हिन्दी

मेने उसके नरम होठों को चुमने की 
इजाजत मांगी 
वो अपने होठ करीब लाकर बोली 
पागल प्यार में इजाजत नहीं होती।


हिन्दी

दील के झरोखे में तुझ को बिठा कर 
रखुंगा में दिल के पास 
मत हो मेरी जां उदास।


हिन्दी

चाहत का क्या हे किसी को भी चाह ले 
मसला मोहब्बत का हे 
सिर्फ एक से होती है।

हिन्दी

साथ बिताई तेरे संग वो शाम सुहानी 
जिंदा हे 
होठ भले सुखे हों 
फीर भी आंखो में पानी जिंदा हे।


हिन्दी

सुनो गुमशुदा हु में आजकल खुद से ही 
तुम अपने दिल में ढुढों 
कहीं में वहां पर तो नहीं।


हिन्दी

तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो,
क्या गम है जिसको छुपा रहे हो?

🎶🎶🎶😶

हिन्दी

उस मोहब्ब्त का क्या 
जिसकी तपिस में दोनों न जले 
जंगल की आग है ये 
जो लग गई 
तो क्या ये किनारा
और क्या वो किनारा 
ख़ाक सब कुछ होना है 
महज हो न हो 
कुछ वक्त लग सकता है।

हिन्दी

पाकीज़ा मोहब्बत की कोई कहानी नहीं होती,
ये रूह से हो कर गुज़रती है, 
इसकी कोई निशानी नहीं होती।

हिन्दी

सिर्फ पा लेने का नाम ही इश्क़ नहीं,
ऐहसास का रिश्ता बनाए रखना भी इश्क़ है।💗 

हिन्दी

मैंने एहसास के धागे में पिरोया है तुझे,
टूट अगर हम गए तो बिखर तुम भी जाओगे।

हिन्दी

गैरों से कहा तुमने, 
गैरों से सुना तुमने,

कुछ हमसे तो कहा होता, 
कुछ हमसे तो सुना होता।

हिन्दी


तन्हाईयों के लम्हें अब तेरी यादों का
पता पुछते हें,
तूम्हें भुलने की बात करुं तो 
ये तेरी खता पुछते हें।

हिन्दी

दिल की ख्वाहीस को नाम क्या दु 
प्यार का उसे पैगाम क्या दु 
इस दिल में दर्द नहीं यादें हे 
उसकी अब यादें ही मुझै दर्द दें 
तो उसे इल्जाम क्या दु।

हिन्दी

तमाम रास्ता फूलों भरा है मेरे लिए 
कहीं तो कोई दुआ माँगता है मेरे लिए,

तमाम शहर है दुश्मन तो क्या है मेरे लिए 
मैं जानता हूँ तिरा दर खुला है मेरे लिए।

हिन्दी

वो बात बात पे जी भर के बोलने वाला 
उलझ के रह गया डोरी को खोलने वाला,

लो सारे शहर के पत्थर समेट लाए हैं हम 
कहाँ है हम को शब ओ रोज़ तौलने वाला।

हिन्दी

कभी मेहरबाँ आँख से परख इस को क्या है ये शय 
हमें क्यूँ है सीने में इस सबब इज़्तिराब सा कुछ,

वो फ़ज़ा न जाने सवाल करने के ब'अद क्या थी 
कि हिले तो थे लब, मिला हो शायद जवाब सा कुछ।

हिन्दी

गुज़र सकूँगा न इस ख़्वाब ख़्वाब बस्ती से 
यहाँ की मिट्टी भी ज़ंजीर-ए-पा है मेरे लिए 

अब आप जाऊँ तो जा कर उसे समेटूँ मैं 
तमाम सिलसिला बिखरा पड़ा है मेरे लिए 

ये हुस्न-ए-ख़त्म-ए-सफ़र ये तिलिस्म-ख़ाना-ए-रंग 
कि आँख झपकूँ तो मंज़र नया है मेरे लिए।

हिन्दी

ख़ैर ..अभी भी है वो मेरे पास .. 
हाँ, सही सोच रहे हो तुम .. इतना वक्त 
गुजर गया फिर भी है ..
पहनती हुँ कभी कभी जब किसी दिन 
बहुत मन होता है तुम्हारे आसपास होने का..

किसी चीज़ में अटक कर फट गया है थोड़ा.. 
रफ़ू करवाना पड़ेगा .. 

कुर्ता है रिश्ता नहीं .. रफ़ू हो ही जाएगा।

हिन्दी

मोहोब्बत करने वालों को 
कब मिला है
मोहोब्बत करने वाला,

मैंने हर आशिक को तन्हाई में अक्सर
रोते देखा है।

हिन्दी

कभी तू आँखों की कशिश
कभी तू मन का राज है,

तू ही तू इस दिल के अन्दर
तू ही इस दिल का साज है,

कभी तू है लहराती पवन
कभी तू खुशनुमा याद है,

तुझसे ही है जन्नत मेरी
तू ही तो मेरी आवाज है।

सिर्फ ओर सिर्फ तुम...

हिन्दी

उमड़ते अश्को को कई बार
गिरने से रोका है
कई बार अपने सपनों को
खुद ही टोका है।

झुलस जायेगा मन
ये जान कर फिर भी
कई बार खुद को
हमने आग में झोंका है।

हिन्दी

मुद्दत के बाद उस ने जो की लुत्फ़ की निगाह 
जी ख़ुश तो हो गया मगर आँसू निकल पड़े।

हिन्दी

यही फ़र्क है हमारे तुम्हारे इश्क़ में, तुमने समय निकाल के चाहा, हमने हर वक़्त तुम्हें चाहा।