ख़ैर ..अभी भी है वो मेरे पास ..
हाँ, सही सोच रहे हो तुम .. इतना वक्त
गुजर गया फिर भी है ..
पहनती हुँ कभी कभी जब किसी दिन
बहुत मन होता है तुम्हारे आसपास होने का..
किसी चीज़ में अटक कर फट गया है थोड़ा..
रफ़ू करवाना पड़ेगा ..
कुर्ता है रिश्ता नहीं .. रफ़ू हो ही जाएगा।
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